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क्या देश को हम अपना एक सपना देंगे?

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— क़मर वहीद नक़वी By; Qamar Waheed Naqvi

आज़ादी के बाद की हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? वह है लोकतंत्र. जैसा भी है, तमाम बुराइयों और समस्याओं के बावजूद यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है. लेकिन हमारी सबसे बड़ी विफलता क्या रही है? जनता!

ईमानदारी की हमारी परिभाषा क्या है? मुझे छोड़ बाक़ी सब को ईमानदार होना चाहिए. मैं जो थोड़ी-बहुत गड़बड़ियाँ करता हूँ, इतना तो चलता है! लेकिन ये एक-एक आदमी की थोड़ी-बहुत गड़बड़ियाँ मिल कर एक अरब गड़बड़ियाँ हो जाती हैं जनाब! सोचिए, इन एक अरब गड़बड़ियों को कौन और कैसे रोक सकता है?

आजकल सपने बेचने का दौर है! जहाँ लोग ख़ुद अपने सपने गढ़ नहीं सकते, उस बाज़ार को तो कोई न कोई सौदागर चाहिए, जो आये और सपने बेच जाय. बात थोड़ी महीन है. सपने गढ़ना, सपने देखना और किसी का सपने दिखाना, इन तीनों में बड़ा फ़र्क़ है. जो सपने बेचता है, वह एक अच्छे सेल्समैन की तरह सपने को ख़ूब चमका-चमका कर दिखायेगा न! अच्छी चटक-मटक पैकिंग होगी, चुलबुल विज्ञापन होंगे! आख़िरकार उसे बाज़ार में अपना माल बेचना है, कमाई करनी है! इसलिए सपनों की मार्केटिंग के इस दौर में यह समझना ज़रूरी है कि सपने गढ़ने, देखने और दिखाये जाने का मतलब क्या है! ख़ास कर इसलिए कि बात आज़ादी के सपनों की हो रही है.

सपने नींद में नहीं जागते हुए गढ़े जाते हैं! लेकिन सपने देखे नींद में जाते हैं! कोई जागते हुए सपना देखे तो? उसे शेख़चिल्ली कहते हैं! सपने गढ़ने और देखने में यही फ़र्क़ है! सपने गढ़े जाते हैं कुछ करने के लिए, कुछ हासिल करने के qwnaqvi-blog-independence-dayलिए, कुछ बदलने के लिए, कुछ नया बनाने के लिए, कुछ सुन्दर रचने के लिए, कुछ मनचाहा बनाने के लिए, कुछ मनचाहा पाने के लिए. सपने गढ़े जाते हैं, सारा जीवन झोंक कर सपने को पूरा करने लिए. लेकिन देखे गये सपने? उनका जीवन तो अकसर उतने पलों का ही होता है, जितने पल सपना रहता है! फिर देखनेवाले ने सपना देखा, देखते हुए सपने में ही खो गया, अच्छा लगा तो मुग्ध हुआ, बुरा सपना हुआ तो डर गया! सुबह तक कुछ याद रहा, कुछ भूल गये, रात गयी, बात गयी! तो देखे सपनों का क्या? कुछ भी देखते रहो, भूलते रहो! और कोई सपना दिखाये तो? सपने बेचे तो? बैठ-बिठाये देखने को सुनहरे सपने तो मिल गये, लोग उसमें मगन हो गये! फिर? आगे मरीचिका है या क्या है? कौन जाने? और सपने किसे बेचे जाते हैं? उन्हें, जो अपने सपने ख़ुद गढ़ नहीं सकते!

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