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‘आप’ ने क्यों सबको साँप सुँघा दिया?

‘आप’ ने सबको साँप सुँघा दिया है. उनकी हालत तो पतली है ही, जिनके हाथ की भाग्य रेखा इस चुनाव में देखते ही देखते सफ़ाचट हो गयी. लेकिन जो चौतरफ़ा जीते, उन हुँकार वालों की भी धुकधुकी लग गयी है. और सूबों के क्षत्रपों के भी दिल बैठने लगे हैं. ‘आप’ की झाड़ू ने राजनीति के तमाम टोटकों को ठिकाने लगा दिया. चुनाव के पहले और चुनाव के बाद, हर मौक़े पर कामयाबी की पूरी गारंटी वाले अचूक ख़ानदानी नुस्ख़े इस बार कुछ काम नहीं आये, वरना अब तक दिल्ली में तीन-तिकड़म से सरकार बनाने का जुगाड़ कब का हो चुका होता! 

भारतीय राजनीति में यह अजूबा सचमुच पहली बार हो रहा है कि सबसे ज़्यादा सीटें जीतनेवाली पार्टी को ज़रा भी इच्छा नहीं हो रही है कि वह सरकार बनाने की कोशिश करे! यह वही पार्टी है जो केन्द्र में तेरह दिन की सरकार बनाने के लिए लड़ मरी थी. आज उसे जोड़तोड़ कर सरकार बनाना अनैतिक लगने लगा है! झारखंड भी अभी कोई कालातीत इतिहास नहीं हुआ है कि लोगों को याद न आये कि बीजेपी ने वहाँ सरकार बनाने या सरकारों में बने रहने के लिए कैसे-कैसे अद्भुत कौशल दिखाये थे. लेकिन आज वह बहुमत से केवल चार के आँकड़े से दूर रह जाने के बावजूद कान पकड़े बैठी है कि न बाबा न, हम ‘अनैतिक’ तरीक़ों से सरकार नहीं बनायेंगे!  Continue reading