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नमो के विकास का तिलिस्म

जलेबी छन रही है और दिमाग़ घूम रहा है. चाशनी विकास की है, घी ‘इंडिया फ़र्स्ट’ मार्का ‘सेकुलरिज़्म’ का है, जलेबी छाननेवाला कपड़ा ‘पिछड़े’ थान का है, कड़ाही सरदार पटेल छाप ‘राष्ट्रीय एकता’ के लोहे की है, आग हिन्दुत्व की है और हलवाई ‘हिन्दू राष्ट्रवादी’ है!
पिछले क़रीब साल भर से बीजेपी अपनी राजनीति का जो तिलिस्मी मंतर ढूँढ रही थी, उसकी शक्ल अब काफ़ी कुछ साफ़ होने लगी है. इसमें मुसलमानों के लिए विज़न डाक्यूमेंट भी है, और उसकी काट के लिए ‘ कुत्ते के पिल्ले’ का मुहावरा भी है, युवाओं और कारपोरेट को रिझाने के लिए विकास का ‘पाॅवर प्वाइंट प्रेज़ेंटेशन’ है तो पिछड़ों के लिए ‘चाय बेचनेवाले पिछड़ी जाति के एक बालक’ के तमाम काले पहाड़ों को लाँघ कर ‘महाविजेता’ बन जाने की एक ‘मर्मस्पर्शी और प्रेरणादायक’ कहानी भी है. अपने परम्परागत मतदाताओं के लिए राम मन्दिर, हिन्दुत्व और अब हिन्दू राष्ट्रवाद का भगवा ध्वज भी है, चीन और पाकिस्तान को नाकों चने चबवा देने के लिए ‘पटेलवाला लोहा’ भी है, तो अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हामी भराने के लिए ख़ास तौर पर ‘कस्टमाइज़्ड सेकुलरिज़्म’ का मुखौटा भी है. Continue reading